Author: ललितालालितः
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परमहंसप्रिया
श्रीगणेशाय नमः । प्रकाशकीय नमाम्यभोगिपरिवारसम्पदं निरस्तभूतिमनुमार्धविग्रहम् । अनुग्रमुन्मृदितकाललाञ्छनं विना विनायकमपूर्वशङ्करम् ॥ श्रीमद्भागवत के प्रथम श्लोक ‘जन्माद्यस्य यतः’ – के ऊपर विद्वत्शिरोमणि मधुसूदनसरस्वती जी ने परमहंसप्रिया नामक व्याख्या लिखी है । यह व्याख्या अद्वैत वेदान्त के संन्यासी जिज्ञासुओं के लिये विचारणीय है । इस ग्रन्थ में महावाक्य का विचार हुआ है । पूर्व में यह व्याख्या…
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श्रीनृसिंहविज्ञापनम्
प्रकाशकीयश्रीनृसिंहविज्ञापन एक पद्यात्मिका रचना है जो श्रीनृसिंहाश्रम के द्वारा प्रकट हुइ है ।यह ग्रन्थ श्रीनृसिंह की परब्रह्मत्वेन वन्दना करता हुआ प्रारम्भ होता है । उसके बाद ग्रन्थकार कहते हैं कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ नहीं पा रहे हैं जो उनके ज्ञान की परीक्षा कर सके , अतः श्रीनृसिंह भगवान् को ही परीक्षक…